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Wednesday, 13 February 2013

"बसंत"



 पीत वसना धरती हरित है,
आम पर झूमकर आई बौर है,
बिखर रहे कोकिला के स्वर हैं,
बरस रहा मधुमास का रस है,
डालियाँ पुष्पों से लदी हुयी हैं,
गुलाब पर कलियाँ खिली-खिली हैं,
हर   पौधा   मुस्कुरा   रहा  है,
गीत प्यारे गा रहा है,
उद्यानों की छटा निराली है,
बसंत ऋतू की निकली सवारी है,
किसी ने बाग़ में डंका बजाय है,
अरे भँवरे ने कहा बसंत आया है,
मनोहारी ठण्ड का मौसम आया है,
दिन की धुप में बड़ा मज़ा आया है,
देखो बसंत पंचमी का दिन आया है,
ब्रह्म्प्रयागिनी की पूजा लाया है,
हे वरदायिनी !!
वीणावादिनी !!
चहुँ और मुखरित तेरा ही गान है,
सुमगे वर दे ,हे विद्यादायिनी !!,
तेरे ही ज्ञान का फैला प्रकाश है...

9 comments:

  1. बहुत प्यारी...मनभावन रचना है...
    आँखों से समक्ष वसंत छा गया...

    सुन्दर!!!
    सस्नेह
    अनु

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  2. मधुमास का सुन्दर वर्णन !!

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  3. बसंत बिखर गया पोस्ट में।

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  4. खूबसूरत वसंत ने लुभाया !

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  5. खूबसूरत वसंत ने लुभाया !

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  6. सुंदरतम
    माँ शारदे का प्यार आप पर बना रहे :)

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